Indian Art
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ललित कला

परिचय

मानव सृष्टि का प्रारम्भ सर्वप्रथम भारत में ही हुआ है, इसकी पुष्टि हमारे प्राचीन इतिहास से होती है| विश्व के अन्य भागों में जब मनुष्य गिरी कन्दराओं में पशुवत जीवन जी रहा था उससे सहस्राब्दियों पूर्व हमारे युगदृष्टा ऋषियों ने वेद जैसे अनुपम ग्रन्थ मानव जाति के कल्याण के लिए रच डाले थे|

वैदिक सभ्यता के निश्चित काल के बारे में अनेकों मत प्रचलित हैं| परन्तु यह सार्वभौम सत्य है कि वेद (ऋग्वेद ) इस सृष्टि का आदि ग्रन्थ है| वेदों में समस्त मानवीय ज्ञान विज्ञान तथा कलाओं का निरूपण है तथा वैदिक काल से ही चित्रकला के संकेत मिलते हैं| भावाभिव्यक्ति के लिए आदिकाल से चित्रकला माध्यम रही है| व्यक्ति के मनोभाव ही उसके चित्रों में झलकते हैं चित्रकला में भावों का उच्च स्थान है | जितनी शुद्ध भावनाएं होंगी, चित्र उतने ही सुंदर एवं सर्वग्राही होंगे|

कला रसात्मक एवं रमणीय अर्थ की प्रतिपादक है | चित्रकार के लिए यह आवश्यक नहीं की वह किसी वास्तविक दृष्टि को ही अपनी कलाकृति बनाएं| यदि कलाकार विशेष मनोवृति से कलाकर्म में जुटता है तो वह अपनी कल्पना शक्ति से अपेक्षित कृति रचना में सफल हो जाता है| बौद्ध धर्म में कला को उच्च स्थान प्रदान किया गया है| हिमाचल प्रदेश के प्राचीन स्मारकों जैसे रामगोपाल मंदिर, डमटाल, भेखली देवी मंदिर, कुल्लू देई साहिबा मंदिर, पांवटा साहिब, राधाकृष्ण मंदिर, डाडासीबा , ठाकुरद्वार औहर, बिलासपुर, हनुमान मंदिर, खुशाला, शिमला आदि मंदिरों में भित्तिचित्र विद्यमान है| प्रदेश के विभिन्न बौद्ध गोम्पा भित्तिचित्रों व थंका से सुसज्जित हैं| प्रदेश के ग्रामीण आंचलों में लोक चित्रकला परम्परा लिखणु के रूप में आज भी प्रचलित है| राजाश्रय प्राप्त चित्रकला में कांगड़ा कलम, चम्बा कलम, मण्डी कलम, बसोहली कलम, गुलेर कलम आदि शैलियाँ फलती-फूलती रही हैं|

चम्बा कलम/चित्रकला कांगड़ा चित्रकला ललित कला
कॉमिक/मित्ति चित्र मूर्तिकला छायाचित्रण
नृत्य नाटक