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शब्द - व्युपत्ति

प्रकार्य

  1. हिमाचल प्रदेश में लोक संस्कृति और लोक भाषा की समृद्ध परम्परा विद्यमान है । यहां की लोक भाषाओं में पहाड़ी और भोटी भाषा की विविध बोलियां प्रचलन में है तथा लोक संस्कृति के अन्तर्गत पारम्परिक रीति रिवाज, पर्व त्यौहार, वेशभूषा, आभूषण, लोक साहित्य और लोक जीवन के सभी विविध आयाम समाहित हैं । प्रदेश की देव परम्परा एक विशिष्ट पहलू है । व्युत्पत्तिशास्त्र प्रभाग के तहत इस सम्बध में निम्नलिखित कार्य हुए हैं :
  2. ‘बाबा बालकनाथ धाम दियोटसिद्ध’ तथा ‘श्री नयना देवी शक्तिपीठ’ मंदिर मोनोग्राफ का आलेखन
  3. ‘हिमाचल प्रदेश के धार्मिक संस्थान’, ‘संस्कृत सुधानिधि’, ‘हिमाचल प्रदेश के पारम्परिक परिधान’ और आभूषण’ एवं ‘हिमाचल प्रदेश के संस्कार गीत’ पुस्तक हेतु सामग्री का संकलन, सम्पादन ।
  4. नाम व्युत्पत्ति :
    इस कार्य के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश के निम्नलिखित कार्य सम्मिलित हैं:
    • हिमाचल प्रदेश के स्थान नाम (व्युत्पत्तिजन्य विवेचनात्मक अध्ययन)-- पुस्तक का सम्पादन कार्य पूर्ण हुआ है और मुद्रण हेतु तैयार है
    • हिमाचल प्रदेश के व्यक्ति नाम (व्युत्पत्तिजन्य सांस्कृतिक अध्ययन )--- विचाराधीन परियोजना
    • पौराणिक ऋषि-मुनियों एवं महापुरूषों का संस्कृत ग्रंन्थों के संदर्भ उल्लेख सहित व्युत्पत्तिजन्य अध्ययन ---विचाराधीन परियोजना

  5. पुनश्चर्या कार्यक्रम:
    • हिमाचल प्रदेश के मंदिरों के पुजारियों के लिए पूजा के उचित विधान, मन्त्रों और स्तोत्रों के शुद्ध उच्चारण तथा भारतीय संस्कृति की समृद्ध परम्परा के सम्यक् अनुशीलन के लिए समय-समय पर भिन्न-भिन्न मंदिरों में पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित ।
    • विगत वषों‍ में सुप्रसिद्ध शंकराचार्य मठ कांचीकामकोटी, तमिलनाडू में भी हिमाचल प्रदेश के पुजारियों के पुनश्चर्या कार्यक्रम आयोजित । पुनश्चर्या कार्यक्रम में विद्वानों द्वारा प्रस्तुत लेखों का संकलन व सम्पादन करके ‘पूजा बोध’ पुस्तक का प्रकाशन