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शब्द - व्युपत्ति

पुस्तक परिचय

‘‘हिमाचल प्रदेश के स्थान नाम’’यह पुस्तक निम्नलिखित छ: अध्यायों में विभक्त है :

  1. सांस्कृतिक परम्परा एवं राष्ट्रीय एकात्मकता
  2. ऐतिहासिक संदर्भ
  3. व्यक्ति और समुदाय
  4. भौगोलिक संरचना
  5. वस्तु साहचर्य
  6. भाषायी तत्त्व

प्रथम अध्याय : सांस्कृतिक परम्परा एवं राष्ट्रीय एकात्मकता : 

हिमाचल प्रदेश के लोकमानस में सांस्कृतिक धरातल पर राष्ट्रीय एकात्मकता का अखण्ड प्रवाह युगों-युगों से विद्यमान है जो कि सांस्कृतिक परम्परा से अनुप्राणित यहां के स्थान नामों में स्पष्ट आलोकित होता है । जिन सांस्कृतिक गौरवशाली विभूतियों एवं सांस्कृतिक आयामों के नाम पर इन स्थान नामों की व्युत्पत्ति हुई है, उन दैवी विभूतियों एवं सांस्कृतिक आयामों के प्रति भारत के प्रत्येक भूभाग की जनता में गहरी आस्था और सम्मान जुड़ा हुआ है जैसे:

मनाली

कुल्लू जिला में मनाली जिला मुख्यालय कुल्लू से उत्तर की ओर 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । मनाली वैवस्वत मन्वन्तर के प्रर्वतक एवं मानव-सृष्टि के विधि विधानों के नियामक मनु महाराज का आदि स्थान है । कहते हैं कि वैवस्वत मन्वन्तर के आरंभ से पूर्व हुए जल-प्लावन के प्रलय के शांत होने पर मनु महाराज ने यहीं निवास किया था और यहीं से उन्होंने वैवस्वत मन्वन्तर की सृष्टि का उचित विधान के साथ संचालन किया था । मनु महाराज का आदि निवास होने से ये स्थान मनु का आलय अर्थात् मनु का घर कहलाया मनुआलय शब्द निरन्तर प्रयोग से मन्वालय बना और बाद में ध्वनि परिवर्तन की प्रक्रिया में प्रयत्न लाघव एवं मुख-सुख के परिणाम स्वरूप मन्वालय से ही मनाली शब्द की व्युत्पत्ति हुई है । प्राकृतिक सौन्दर्य तथा सांस्कृतिक वैभव से परिपूर्ण मनाली का नाम पर्यटन मानचित्र पर विश्वविख्यात होने से नया मनाली शहर अस्तित्त्व में आने पर मनाली गांव अब पुरानी मनाली कहलाता है जो कि मनाली के मुख्य बस अड्डे से लगभग दो किलोमीटर दूर है । इस गांव में मनु महाराज का प्राचीन मंदिर विद्यमान है ।

चामुण्डा

भगवती दुर्गा भवानी से चतुरंगिणी सेना के साथ युद्ध करने दो महा दैत्य चण्ड और मुण्ड आए तो भगवती दुर्गा के ललाट से एक विकराल मुख वाली शक्ति ‘काली’ प्रकट हुई । उसने सारी दैत्य सेना का विनाश कर दिया और चण्ड और मुण्ड को मार कर वह उनके सिर देवी चण्डिका के पास ले गई । अपने पास लाए ये सिर देख कर कल्याणमयी देवी चण्डिका ने मधुर वाणी में कहा कि देवी । तुम चण्ड और मुण्ड के सिर लेकर मेरे पास आई हो, इसलिए संसार में तुम्हारी ख्याति चामुण्डा के नाम से होगी -

यस्माच्चण्डं च मुण्डं च गृहीत्वा त्वमुपागता ।
चामुण्डेति ततो लोके ख्यातो देवि भविष्यति ।।

चामुण्डा भगवती बाद में कई जगह प्रकट हुई, जहां इसके पूज्य स्थल स्थापित हुए । इनका एक प्रमुख स्थल हिमाचल प्रदेश में जिला कांगड़ा की बनेर खड्ड जो कि बाण गंगा के नाम से प्रसिद्ध है, के किनारे स्थित है । ये स्थान जिला मुख्यालय धर्मशाला से 14 किलोमीटर दूर है । चामुण्डा भगवती की प्रसिद्धि के कारण इस स्थान का नामकरण चामुण्डा हुआ है ।

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